एकांतवास का प्रेम इस बात का लक्षण है कि तुममें ज्ञान कि खोज करने की प्रवृत्ति है; परंतु स्वयं ज्ञान केवल तभी प्राप्त होता है जब हम भीड़-भाड़ के अंदर, संग्राम और हाट-बाजार के अंदर एकांतता का स्थायी बोध प्राप्त कर लेते है ।

संदर्भ : विचारमाला और सूत्रावली

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