जीवन में एकमात्र सुरक्षा, अपनी पुरानी भूलों की परिणामों से बचने का एकमात्र रास्ता आंतरिक विकास है, जो भागवत उपस्थिति के साथ सचेतन एकत्व स्थापित करने में सहायक होता है । वह एकमात्र सच्चा पथप्रदर्शक हमारी सत्ता का और सभी सत्ताओंका का ‘सत्य’ है ।
संदर्भ : ‘विचार और सूत्र’ के प्रसंग में
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…