भगवान् पर संपूर्ण भरोसा करने में ही आनंद है।
सन्दर्भ : श्री मातृवाणी (खण्ड-१६)
मेरे प्यारे बालक, तुम हमेशा मेरी भुजाओं में रहते हो और मैं तुम्हें सुख-सुविधा देने,…
हर व्यक्ति अपने स्वभाव के अनुसार कार्य करता है और अगर वह साहस के साथ,…
हर एक के जीवन में एक ऐसा क्षण आता है जब उसे दिव्य मार्ग और…
अगर तुम कुछ न करो तो तुम्हें अनुभव नहीं हो सकता। सारा जीवन अनुभव का…
एक या दो बार, बस खेल-ही-खेलमें आपने अपनी या श्रीअरविंदकी कोई पुस्तक ली और सहसा…
हे प्रभु ! तू क्या मुझे यह शिक्षा देना चाहता है कि जिन सब प्रयासों-…
मधुर मां, योग और धर्म में क्या अन्तर है? आह ! मेरे बच्चे... यह तो…