इन मायावी वनों में एक देवशिशु खेल रहा है,
आत्मभाव की धाराओ के तट पर बंशी बजाता रसमाधुरी बहा रहा है,
कब उसकी पुकार की ओर मुड़ेंगे वह उस घड़ी की प्रतीक्षा में हैं ।
संदर्भ : सावित्री
मधुर माँ, क्या नींद में अपने ऊपर पूरी तरह नियंत्रण पाना संभव है ? उदाहरण…
व्यापक दृष्टि से विचार करने पर मुझे ऐसा लगता है कि प्रचार करने योग्य सबसे…
तुम पानी में गिर पड़ते हो। वह विपुल जलराशि तुम्हें भयभीत नहीं करती। तुम हाथ-पांव…
अंदर की बेचैनी ही तुम्हें आंतरिक और बाह्य रूप से नींद लेने से रोकती है।…
तुम्हें डरना नहीं चाहिये। तुम्हारी अधिकतर कठिनाइयां भय से आती है। वास्तव में, ९० प्रतिशत…