श्रेणियाँ श्री माँ के वचन

अहंकार से छुटकारा

अपने अहंकार को निकाल फेंकना, उसे एक रद्दी कपड़े की तरह गिरा देना।

इसके लिए जो प्रयास करना पड़ता है, परिणाम उसके योग्य होता है, और फिर तुम मार्ग पर अकेले नहीं होते। यदि तुम्हें विश्वास हो तो तुम्हें सहायता मिलती है।

अगर पल भर के लिए भी तुम्हारा भागवत कृपा के साथ सम्पर्क हुआ हो – उस अद्भुत कृपा के साथ जो तुम्हें ले चलती है, मार्ग पर तेज चलाती है, जो तुम्हें यह भी भुला देती है कि तुम्हें तेजी करनी है-उसके
साथ पल भर का भी सम्पर्क हुआ हो तो तुम कोशिश कर सकते हो कि उसे भूलने न पाओ और फिर एक बालक-की-सी निष्कपटता, बच्चे की सरलता के साथ, जिसके सामने कोई झमेले नहीं हैं, तुम अपने-आपको उस ‘कृपा’ के हाथों में सौंप सकते हो और उसे सब कुछ करने दे सकते हो।

जरूरी यह है कि उसकी न सुनो जो प्रतिरोध करता है, उस पर विश्वास न करो जो खण्डन करता है-एक विश्वास हो, सच्चा विश्वास, ऐसा विश्वास हो जिसमें तुम अपने-आपको बिना हिसाब-किताब किये,
बिना सौदेबाजी के, पूरी तरह से दे देते हो। विश्वास! ऐसा विश्वास जो कहता है-“यह करो, मेरे लिए यह करो, यह मैं तुम्हारे  ऊपर छोड़ता हूँ ।”

यही उत्तम उपाय है।

संदर्भ : प्रश्न और उत्तर (१९५७-१९५८)

शेयर कीजिये

नए आलेख

भागवत करुणा और न्याय का कठघरा

भूल या सजा देने का कोई प्रश्न ही नहीं है-अगर लोगों को हम उनकी भूलों…

% दिन पहले

साहस और प्रेम

साहस और प्रेम ही अनिवार्य गुण हैं; और यह सब गुण यदि धुँधले या निस्टेज…

% दिन पहले

आगे बढ़ने का रहस्य

इन छोटी-छोटी बातों से क्यों उत्तेजित हो जाते हो? या उनसे अपने को क्यों विचलित…

% दिन पहले

परात्पर भगवान की ओर

जो श्रद्धा वैश्व भगवान के प्रति जाती है वह लीला की आवश्यकताओं के कारण अपनी…

% दिन पहले

भागवत कार्य में स्थान

भगवान मुझसे क्या चाहते है ? वे चाहते है कि पहले तुम अपने-आपको पा लो,…

% दिन पहले

प्रार्थना

हे समस्त वरदानों के परम वितरक, तुझे, जो इस जीवन को शुद्ध, सुन्दर और शुभ बना…

% दिन पहले