शांत रहो और शांति के साथ विश्वासपूर्वक अपना उत्सर्ग कर दो।
जो कुछ होता है वह हमेशा परम प्रभु की इच्छा का प्रभाव होता है ।
मानव कर्म अवसर तो हो सकता है परंतु कारण कभी नहीं ।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)
मैं तुम्हें अपना पुराना मन्त्र बताती हूं; यह बाह्य सत्ता को बहुत शान्त रखता है…
अगर अपात्रता का भाव तुम्हें उमड़ती हुई कृतज्ञता से भर देता है और आनन्दातिरेक के…
कभी मत बुड़बुड़ाओ । जब तुम बुड्बुड़ाते हो तो तुम्हारे अन्दर सब तरह की शक्तियां…