श्रेणियाँ श्री माँ के वचन

अपने चरित्र को बदलने का प्रयास करना

सबसे पहले हमें सचेतन होना होगा, फिर संयम स्थापित करना होगा और लगातार संयम को बनाये रख कर हम अपनें स्वभाव को परिवर्तित कर लेते हैं। स्वभाव का परिवर्तन सबसे अंत में आता है। हमें अपनी बुरी आदतों पर, पुरानी आदतों पर संयम प्राप्त करना होता है, इतने दीर्घकाल तक संयम रखना पड़ता है कि वे सब झड़ जायें और स्वभाव बदल जाये।

हम किसी ऐसे व्यक्ति का उदाहरण ले सकते हैं, जो बार-बार अवसन्न हो जाता है। जब चीज़ें ठीक वैसे नहीं होतीं जैसी कि वह उन्हें चाहता है तो वह अवसन्न हो जाता है। अतः प्रारम्भ करने के लिए, उसे अपने अवसाद के विषय में सचेतन होना होगा – केवल अवसाद के विषय में ही नहीं बल्कि अवसाद के कारणों के विषय में भी सचेतन होना होगा कि क्यों वह इतनी आसानी से अवसन्न हो जाता है। उसके बाद, जब एक बार वह सचेतन हो जाये तो उसे अपने अवसादों पर प्रभुत्व प्राप्त करना होगा, जब अवसाद का कारण उपस्थित हो फिर भी उसे अवसन्न होना बंद कर देना होगा – उसे अपने अवसाद पर विजय प्राप्त करनी होगी, उसका आना रोक देना होगा। और अंत में, इस कार्य के लम्बे समय तक होते रहने के बाद, उसकी प्रकृति अवसन्न होने की आदत खो देती है और उसके बाद अब उसी ढंग से प्रतिक्रिया नहीं करती, उसकी प्रकृति बदल जाती है।

संदर्भ : प्रश्न और उत्तर १९५०-१९५१

शेयर कीजिये

नए आलेख

प्रभो, वर दे!

उनके दुःख-दर्द से तीव्र रूप से पीड़ित होकर मैं तेरी ओर मुड़ी और उसका उपचार…

% दिन पहले

तीन शर्तें

भागवत शक्ति को ग्रहण करने की क्षमता प्राप्त करने तथा तुम्हारे माध्यम से बाह्य जीवन…

% दिन पहले

भगवान तुम्हारे साथ हैं

यह कभी न भूलो कि तुम अकेले नहीं हो । भगवान् तुम्हारे साथ हैं, तुम्हारी…

% दिन पहले

चिंता

चिंता करना जहर का प्याला पीने के समान है । संदर्भ : पथ पर 

% दिन पहले

महान अंत ? या महान आरंभ?

जहाँ कहीं तुम एक महान अंत देखो, निश्चित हो जाओ कि एक महान आरंभ हो…

% दिन पहले

यादें

हमें यादों से इतना स्नेह होता है क्योंकि वे सार्वभौमिक हैं। उनके अन्दर 'अनन्तता' के…

% दिन पहले