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अन्याय का दण्ड

माताजी,

क्या भगवान् अन्याय के दण्ड देते हैं ? क्या भगवान् के लिये किसी को दण्ड देना सम्भव है ?

भगवान् चीजों को उस तरह नहीं देखते जैसे मनुष्य देखते हैं और उन्हें दण्ड देने और पुरस्कार देने की आवश्यकता नहीं होती । प्रत्येक क्रिया अपने अन्दर अपना फल और अपना परिणाम लिये रहता है ।
कर्म की प्रकृति के अनुसार वह तुम्हें ‘भगवान्’ के निकट लाता है या ‘उनसे’ दूर ले जाता है । और यही परम परिणाम है ।

संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)

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