साहस और प्रेम ही अनिवार्य गुण हैं ; और सब गुण यदि धुँधले या निस्तेज पड़ जायें फिर भी ये दोनों आत्मा को जीवित रखेंगे।
साहस का अर्थ है भय के सभी रूपों की पूर्ण अनुपस्थिति।
संदर्भ : विचार और सूत्र के प्रसंग में
जीवनयात्रा में समस्त भय, संकट और विपदा का सामना करने के लिए कवच के रूप…
अपने तुच्छ, स्वार्थपूर्ण व्यक्तित्व से बाहर निकलो ओर अपनी भारतमाता के योग्य शिशु बनो ।…
सारी समस्या का निचोड़ यह है : बुद्धि के मानसिक प्रशासन की जगह आध्यात्मिक चेतना…