अतिमानस का द्वार

केवल अपने लिए अतिमानस को प्राप्त करना मेरा अभिप्राय बिल्कुल नहीं है  – मैं अपने लिए कुछ भी नहीं कर रहा; क्योंकि मुझे अपने लिए किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं है, न तो मोक्ष की और न अतिमानसिक स्थिति की। यदि मैं अतिमानसीकरण के लिए कोशिश कर रहा हूँ तो वह सिर्फ़ इसलिए कि पृथ्वी-चेतना के लिए इस काम का किया जाना आवश्यक है . . .।स्वयं मेरा अतिमानसिक स्थिति को प्राप्त करना पृथ्वी-चेतना के लिए अतिमानस के द्वार खोलने की कुंजीमात्र है। मेरा उसको केवल प्राप्त करने के उद्देश्य से ही प्राप्त करना बिल्कुल बेकार होगा।

संदर्भ : श्रीअरविंद के पत्र (भाग-२)

शेयर कीजिये

नए आलेख

अच्छी नींद के लिए

अंदर की बेचैनी ही तुम्हें आंतरिक और बाह्य रूप से नींद लेने से रोकती है।…

% दिन पहले

भय और बीमारी

तुम्हें डरना नहीं चाहिये। तुम्हारी अधिकतर कठिनाइयां भय से आती है। वास्तव में, ९० प्रतिशत…

% दिन पहले

सच्ची करुणा

साधक को क्या होना चाहिये इसके बारे में मैं तुम्हारे भावों की कदर करती हूँ…

% दिन पहले

आशा

हमारी प्रकृति न केवल संकल्प और ज्ञान के क्षेत्र में प्रान्त है बल्कि शक्ति के…

% दिन पहले

परमात्मा हास्यप्रिय है

श्रीअरविंद ने कितनी ही बार इस बात को दोहराया है कि परमात्मा हास्यप्रिय हैं और…

% दिन पहले

अभीप्सा का तात्पर्य

अभीप्सा का तात्पर्य है, शक्तियों को पुकारना । जब शक्तियाँ प्रत्युत्तर दे देती हैं, तब…

% दिन पहले