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विचार और सूत्र के प्रसंग में

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दुर्भाग्य
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दुर्भाग्य

by श्री माँ 2 महीना ago2 महीना ago
एकमात्र मार्ग
410

एकमात्र मार्ग

by श्री माँ 5 महीना ago5 महीना ago
  • 420
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    सत्य का सबसे बुरा शत्रु

    तर्क-शास्त्र का कार्य एक विचार से दूसरे विचार पर और एक तथ्य से उसके परिणामों पर सही निष्कर्ष से पहुंचना है। किन्तु स्वयं इसके अन्दर...

    श्री माँ
    by श्री माँ 6 महीना ago6 महीना ago
  • 280
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    अनिवार्य गुण

    साहस और प्रेम ही अनिवार्य गुण हैं ; और सब गुण यदि धुँधले या निस्तेज पड़ जायें फिर भी ये दोनों आत्मा को जीवित रखेंगे।...

    श्री माँ
    by श्री माँ 8 महीना ago8 महीना ago
  • 560
    श्रीअरविंद आश्रम की श्री माँ का सुंदर चित्रा
    श्री माँ के वचन

    पूर्ण समता

    जिन घटनाओं की हम प्रतीक्षा नहीं करते, जिनकी हम आशा या इच्छा नहीं करते, जो हमारी इच्छाओं के विरुद्ध होती है उन्हें ही हम अज्ञानवश...

    श्री माँ
    by श्री माँ 10 महीना ago10 महीना ago
  • 630
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    मरकर दोबारा जन्म

    यदि व्यक्ति यह अनुभव करे कि उसका इस जीवन का कार्य समाप्त हो गया है और अब भेंट देने के लिए उसके पास और कुछ...

    श्री माँ
    by श्री माँ 12 महीना ago12 महीना ago
  • 290
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    भागवत कृपा में विश्वास

    जीवन की सभी परिस्थितियों की व्यवस्था हमें यह सिखाने के लिए की गयी है कि मन से परे, भागवत कृपा में विश्वास ही हमें सभी...

    श्री माँ
    by श्री माँ 1 वर्ष ago1 वर्ष ago
  • 620
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    सच्चा प्रेम

    ‘सच्चा प्रेम’ जो तृष्टि और आलोकित करता है, वह नहीं है जिसे तुम पाते हो, बल्कि वह है जो तुम देते हो। और ‘परम प्रेम...

    श्री माँ
    by श्री माँ 1 वर्ष ago1 वर्ष ago
  • 370
    श्री माँ के वचन

    देवत्‍व का लक्षण

    श्रीअरविंद हमसे कहते हैं कि सभी परिस्थितियों में प्रेम को विकीरत करते रहना ही देवत्व का लक्षण है, वह उसे भी प्यार करता है जो...

    श्री माँ
    by श्री माँ 1 वर्ष ago1 वर्ष ago
  • 560
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    वृद्धावस्था और मृत्यु

    यदि व्यक्ति यह अनुभव करे कि उसका इस जीवन का कार्य समाप्त हो गया है और अब भेंट देने के लिए उसके पास और कुछ...

    श्री माँ
    by श्री माँ 1 वर्ष ago1 वर्ष ago
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    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    दूसरों की बातों में टाँग नहीं अड़ाना

    … हस्तक्षेप न करना सदा ही अधिक बुद्धिमानी की बात है-लोग बिना किसी तुक या कारण के हस्तक्षेप करते हैं, केवल इसलिए कि दूसरों को...

    श्री माँ
    by श्री माँ 2 वर्ष ago6 महीना ago
  • 590
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    प्रार्थना क्यों ?

    … बहुत कठोर युक्ति-तर्कवाले लोग तुमसे कहते हैं : “तुम प्रार्थना क्यों करते हो? तुम अभीप्सा क्यों करते हो? तुम मांगते क्यों हो? भगवान् जो...

    श्री माँ
    by श्री माँ 2 वर्ष ago2 वर्ष ago

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  • स्थायी अचंचलता

    स्थायी अचंचलता

  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    शांति मंत्र

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    घर और काम में साधना

    घर और काम में साधना

  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    अपात्रता का भाव

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्री माँ
    दो चीज़ें

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्री माँ
    कभी मत बुड़बुड़ाओ

    कभी मत बुड़बुड़ाओ

  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    सचेतन अभीप्सा की अवस्था

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    आंतरिक परिवर्तन

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  • महर्षि श्रीअरविंद का चित्र
    भागवत तत्त्व आवश्यक वस्तुओं को लिये चलता है

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    निराशा से दूर रहो

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ कक्षा लेते हुए
    क्या बच्चो को सज़ा देनी चाहिये?

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    सच्चा सुख कब ?

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  • श्रीमाँ का चित्र
    तेरा आश्वासन

    तेरा आश्वासन

  • श्रीअरविंद का चित्र
    आध्यात्मिक जीवन में सफलता

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    प्रार्थना

    प्रार्थना

  • श्रीअरविंद का चित्र
    समग्र योग का अर्थ

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्रद्धा के नेत्र

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    माताजी की शक्ति

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