दिव्यत्व कैसे ?
स्वयं को ब्रह्मांड की अंतिम सीमाओं और उससे भी आगे तक फैला दो। स्वयं के ऊपर ले लो विकास की सारी अवश्यकताएँ और उन्हें एकत्व...
स्वयं को ब्रह्मांड की अंतिम सीमाओं और उससे भी आगे तक फैला दो। स्वयं के ऊपर ले लो विकास की सारी अवश्यकताएँ और उन्हें एकत्व...
… बहुत कठोर युक्ति-तर्कवाले लोग तुमसे कहते हैं : “तुम प्रार्थना क्यों करते हो? तुम अभीप्सा क्यों करते हो? तुम मांगते क्यों हो? भगवान् जो...
प्रकति में एक ऊपर उठने वाला विकास है जो पत्थर से पौधों में और पौधे से पशु में तथा पशु से मनुष्य में उठता है;...
बड़ी उम्र में श्रीमां को दिनानुदिन अधिकाधिक फुतीला, उत्साहपूर्ण, युवा देख हमारे हृदय में उनकी वही वाणी गूंजा करती थी जो एक बार बातचीत के...