. . . संसार का जीवन अपने स्वभाव में अशांति का क्षेत्र है - उचित तरीके से उस पर चलने…
"कितनी दूर मैं आ गया हूँ, और कितना रास्ता मुझे तय करना है?" - ऐसे प्रश्न बहुत उपयोगी नहीं होते।…
श्रीअरविंद तथा श्रीमाँ के प्रभाव को ग्रहण करने के लिए श्रद्धा के साथ-साथ आवश्यकता है बस आध्यात्मिक पथ का अनुसरण…
श्रीमाँ के साथ आन्तरिक संपर्क बढ़े - जब तक वह न होगा, बाहरी संपर्को की बहुलता के द्वारा आसानी से…