“कितनी दूर मैं आ गया हूँ, और कितना रास्ता मुझे तय करना है?” – ऐसे प्रश्न बहुत उपयोगी नहीं होते। श्रीमाँ को कर्णधार बना कर प्रवाह के साथ बहो। वे तुम्हें तुम्हारें निर्धारित बन्दरगाह पर पहुंचा देगी ।
संदर्भ : श्रीअरविंद की बंगला रचनाएँ
तुम्हें जो चीज़ जाननी चाहिये वह है, ठीक तरह से यह जानना कि तुम जीवन…
उनके दुःख-दर्द से तीव्र रूप से पीड़ित होकर मैं तेरी ओर मुड़ी और उसका उपचार…
भागवत शक्ति को ग्रहण करने की क्षमता प्राप्त करने तथा तुम्हारे माध्यम से बाह्य जीवन…
यह कभी न भूलो कि तुम अकेले नहीं हो । भगवान् तुम्हारे साथ हैं, तुम्हारी…
जहाँ कहीं तुम एक महान अंत देखो, निश्चित हो जाओ कि एक महान आरंभ हो…