श्रीअरविंद का देह त्याग
श्रीअरविंद ने , सामूहिक सिद्धि के मुहूर्त को शीघ्र लाने के लिए, अपनी देह की सिद्धि का परित्याग कर, परम निस्स्वार्थ भाव से अपने शरीर...
श्रीअरविंद ने , सामूहिक सिद्धि के मुहूर्त को शीघ्र लाने के लिए, अपनी देह की सिद्धि का परित्याग कर, परम निस्स्वार्थ भाव से अपने शरीर...
श्रीअरविंद धरती पर अतिमासनिक जगत की अभिव्यक्ति की घोषणा करने आये थे और उन्होने इस अभिव्यक्ति की घोषणा ही नहीं की बल्कि अंशत: अतिमानसिक शक्ति...
समस्त धन-सम्पदा भगवान् की है, भगवान् उसे जीवित प्राणियों को उधार देते है और स्वभावत: उसे उन्हें भगवान् के पास लौटा देना चाहिये। संदर्भ :...
ठहरो और प्रतीक्षा करो। परिणाम निश्चित है-लेकिन मार्ग और समय अनिश्चित हैं । संदर्भ : माताजी के वचन (भाग – १)
भूतकाल की लहरों को अपने पास से बह कर दूर चले जाने दो, जो समस्त आसक्तियों और समस्त दुर्बलताओं को भी अपने साथ बहा ले...
विरोधी शक्तियों को संसार में इसीलिए सहा जाता है क्योंकि वे मनुष्य की सच्चाई की परख करती हैं। जिस दिन मनुष्य पूरी तरह सच्चा हो...
आध्यात्मिकता शक्तियाँ अचंचलता, शांति और नीरवता में काम करती है। सारी हलचल और उत्तेजना विरोधी प्रभाव से आती है । संदर्भ : माताजी के वचन...
श्रीअरविंद ने अपने शरीर के बारे में जो निर्णय किया उसके लिए बहुत हद तक धरती और मनुष्यों में ग्रहणशीलता का अभाव जिम्मेदार है ।...