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माताजी के वचन भाग-२

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अपात्रता का भाव
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अपात्रता का भाव

by श्री माँ 4 दिन ago6 दिन ago
कभी मत बुड़बुड़ाओ
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कभी मत बुड़बुड़ाओ

by श्री माँ 6 दिन ago7 दिन ago
  • 740
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    औरों के बारे में

    और लोग क्या करते हैं उसके बारे में अपने-आपको कष्ट न दो, मैं इस बात को बार-बार नहीं दोहरा सकती।औरों के बारे में निश्चय न...

    श्री माँ
    by श्री माँ 2 वर्ष ago2 वर्ष ago
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    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    विस्तार

    विश्व की अंतिम सीमा तक … बल्कि उसके भी परे तक अपना विस्तार करो। प्रगति की समस्त आवश्यकताओं को हमेशा अपने ऊपर ले लो और...

    श्री माँ
    by श्री माँ 2 वर्ष ago2 वर्ष ago
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    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    आन्तरिक शांति

    “साधना” करते समय बाह्य चीजों का बहुत महत्व नहीं होना चाहिये। आवश्यक आन्तरिक शांति हर तरह की परिस्थिति में स्थापित हो सकती है । संदर्भ...

    श्री माँ
    by श्री माँ 2 वर्ष ago2 वर्ष ago
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    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ दर्शन देते हुये
    श्री माँ के वचन

    धीरज रखना

    किसी एक चीज़ को बनाने के लिये किसी और चीज़ को तोड़ देना कोई अच्छी नीति नहीं हैं। जो निवेदित हैं और भगवान के लिये...

    श्री माँ
    by श्री माँ 2 वर्ष ago2 वर्ष ago
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    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    प्राण

    प्राण है हमारी शक्ति, ऊर्जा , उत्साह तथा प्रभावशाली गति का आसन , लेकिन उसे व्यवस्थित प्रशिक्षण की जरूरत होती है । संदर्भ : माताजी...

    श्री माँ
    by श्री माँ 2 वर्ष ago2 वर्ष ago
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    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    समझने की क्षमता

    मन की नीरवता का अभ्यास करो। इससे समझने की क्षमता आती है । संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)

    श्री माँ
    by श्री माँ 2 वर्ष ago2 वर्ष ago
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    श्रीअरविंद आश्रम की श्री माँ टेनिस खेलते हुये
    श्री माँ के वचन

    कामना

    जब तुम्हारें अंदर कोई कामना हो तो तुम अपनी वांछित वस्तु द्वारा शासित होते हो, वह तुम्हारें मन और जीवन पर कब्जा कर लेती है...

    श्री माँ
    by श्री माँ 2 वर्ष ago2 वर्ष ago
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    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    अस्थायी और स्थायी

    वह सब जो मानव संबन्धो पर आश्रित है, अस्थायी है और आता-जाता रहता है, वह मिला-जुला और असन्तोषजनक होता है। केवल वही जो भगवान पर...

    श्री माँ
    by श्री माँ 2 वर्ष ago2 वर्ष ago
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    श्रीअरविंद आश्रम की श्री माँ
    श्री माँ के वचन

    दिव्य लीला

    सारा काम खेल होना चाहिए, लेकिन वह हो दिव्य लीला, जिसे स्वयं भगवान के साथ और भगवान के लिये खेला जाता है । संदर्भ :...

    श्री माँ
    by श्री माँ 2 वर्ष ago2 वर्ष ago
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    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    आराम करना

    जिस क्षण तुम संतुष्ट हो जाओ और अभीप्सा करना छोड़ दो, उसी क्षण से तुम मरना शुरू कर देते हो। जीवन गति है, जीवन प्रयास...

    श्री माँ
    by श्री माँ 2 वर्ष ago2 वर्ष ago

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3 conditions of yoga auroville bases of yoga Mirra Alfassa Priti Das Gupta Sri Aurobindo Ashram sri aurobindo The Mother The Mother of Sri Aurobindo Ashram Pondicherry The Mother on Sports अध्यात्मिकता आंरोंविल आश्वासन कृपा निद्रा और स्वप्न पूर्ण योग प्रीति दास गुप्ता भागवत उपस्थिती भारत के लिये संदेश माताजी की झाकियां माताजी के वचन भाग-१ माताजी के वचन भाग-२ माताजी के वचन भाग - ३ माताजी के विषय में मातृवाणी योग योग समन्वय यौवन वयवहारिक ज्ञान साधकों के लिये विचार और सूत्र के प्रसंग में विश्वास व्यावहारिक ज्ञान साधकों के लिये शिक्षा के ऊपर श्रद्धा श्री अरविंद श्रीअरविंद श्रीअरविंद के वचन श्री अरविद श्री माँ श्री माँ अपने बारे में श्री माँ के बारें में श्री माँ के बारे में श्री माँ के संस्मरण श्री माँ शरीर के बारें में साधना साधना के संकेत श्री माँ द्वारा
  • स्थायी अचंचलता

    स्थायी अचंचलता

  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    शांति मंत्र

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    घर और काम में साधना

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    अपात्रता का भाव

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    दो चीज़ें

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    कभी मत बुड़बुड़ाओ

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    सचेतन अभीप्सा की अवस्था

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    आंतरिक परिवर्तन

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  • महर्षि श्रीअरविंद का चित्र
    भागवत तत्त्व आवश्यक वस्तुओं को लिये चलता है

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    निराशा से दूर रहो

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ कक्षा लेते हुए
    क्या बच्चो को सज़ा देनी चाहिये?

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    सच्चा सुख कब ?

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    तेरा आश्वासन

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  • श्रीअरविंद का चित्र
    आध्यात्मिक जीवन में सफलता

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    प्रार्थना

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    समग्र योग का अर्थ

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    श्रद्धा के नेत्र

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    माताजी की शक्ति

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