पाप का अस्तित्व ही नहीं
‘परम प्रभु’ के लिए पाप का अस्तित्व ही नहीं है – सभी त्रुटियां और दोष सच्ची अभीप्सा और रूपान्तर द्वारा मिटाये जा सकते हैं ।...
‘परम प्रभु’ के लिए पाप का अस्तित्व ही नहीं है – सभी त्रुटियां और दोष सच्ची अभीप्सा और रूपान्तर द्वारा मिटाये जा सकते हैं ।...
तुम्हें जो चीज जाननी चाहिए वह है, ठीक तरह से यह जानना कि तुम जीवन में क्या करना चाहते हो| इसे सीखने में जो समय...
अगर तुम्हारे अन्दर श्रद्धा और विश्वास है, तो तुम गुरु के मानव रूप की पूजा नहीं करते बल्कि उन परम प्रभु को पूजते हो जो...
भौतिक मन का एक प्रमुख कार्य है सन्देह करना। अगर तुम उस पर कान दो तो वह सन्देह के हजारों कारण ढूंढ निकालेगा। लेकिन तुम्हें...
भगवान् के बाहर सब कुछ मिथ्या, भ्रान्ति और दुःखपूर्ण अंधकार है। भगवान् में हैं जीवन, प्रकाश और आनन्द । भगवान् के अन्दर ही परम शान्ति...
सच्ची बुद्धि पाने के लिए अपने मन से बाहर निकलो । सच्ची अनुभूति पाने के लिए संवेदनों से बाहर निकलो । सच्ची क्रियाशीलता पाने...
भगवान के प्रति सच्चे और निष्कपट निवेदन में ही हम अपने अति-मानवीय दुखों से छुटकारा पा सकते हैं । संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)
’भागवत कृपा’ कार्य करने के लिए हमेशा मौजूद है लेकिन तुम्हें उसे कार्य करने देना चाहिये, उसकी क्रिया का प्रतिरोध नहीं करना चाहिये। एकमात्र आवश्यक...
’भागवत कृपा’ के सामने कौन योग्य है और कौन अयोग्य ? सभी तो उसी एक दिव्य ‘मां’ के बालक हैं । ‘उनका’ प्रेम उन...
स्वांग मत करो, बनो । वचन मत दो, करो । सपने मत देखो, चरितार्थ करो । संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)