भागवत उपस्थिती
‘भागवत उपस्थिति’ दिन-रात सतत मौजूद है । चुपचाप अन्दर की ओर मुड़ना काफी है और हम उसे पा लेंगे । संदर्भ :माताजी के वचन (भाग...
‘भागवत उपस्थिति’ दिन-रात सतत मौजूद है । चुपचाप अन्दर की ओर मुड़ना काफी है और हम उसे पा लेंगे । संदर्भ :माताजी के वचन (भाग...
तुम्हें हमेशा पूरी-पूरी सहायता दी जाती है, लेकिन तुम्हें उसे अपने बाहरी साधनों द्वारा नहीं बल्कि अपने हृदय की नीरवता में ग्रहण करना सीखना होगा।...
तुम जो कुछ भी करो वह उपयोगी हो उठता है यदि तुम उसमें सत्य-चेतना की एक चिंगारी रख दो। तुम जो कर्म करते हो उसकी...
अगर तुम तकलीफ के बारे में सोचते ही रहोगे तो वह बढ़ती चली जायेगी । अगर तुम उस पर केन्द्रित हुए तो वह फूल उठेगी, उसे...
भगवान् भले ही तुम्हारी ओर झुक आयें परन्तु ‘उन्हें ‘ ठीक तरह समझने के लिए तुम्हें ‘उन’ तक उठना होगा । संदर्भ : माताजी के वचन...
डरने की कोई बात नहीं है- सब कुछ ‘परम प्रभु’ हैं– ‘परम प्रभु’ के सिवाय और कुछ नहीं है; एकमात्र भगवान् का ही अस्तित्व है...
अगर सचमुच तुम भगवान् से प्रेम करते हो तो इसे अचंचल और शान्त रहकर प्रमाणित करो । हर एक के जीवन में जो कुछ आता...
अनुभूति तार्किक मन से बहुत आगे तक जाती है । स्पष्ट है कि तार्किक मन को भगवान् तक पहुंचाना बहुत कठिन लगता है लेकिन सरल...
माताजी, मैं अपनी चीजें बार-बार क्यों खोता रहता हूं ? क्योंकि तुम चीजों को काफी हद तक अपनी चेतना में नहीं रखते। ...
तुम जो करते हो उसे बिना रुचि के करने से थकान आती है । तुम जो कुछ करो उसमें रुचि ले सकते हो बशर्ते कि...