माताजी के वचन भाग-२

अपनी चेतना को विस्तृत करों

​सारी मुश्किल इस बात से आती है कि तुम किसी के साथ तब तक सामञ्जस्य नहीं कर सकते जब तक…

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सावधानी

अगर तुम जीवन में एक भूल करो तो हो सकता है कि तुम्हें सारे जीवन कष्ट उठाना पड़े। इसका यह…

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अवतार की सम्भावना

अवतार की सम्भावना पर विश्वास करने या न करने से प्रकट तथ्य पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। अगर भगवान किसी…

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मार्ग की कठिनाइयाँ

जो भी पूर्णता के मार्ग पर बढ़ना चाहता है उसे मार्ग में आने वाली कठिनाइयों के बारे में कभी शिकायत…

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भय और बीमारी

तुम्हें डरना नहीं चाहिये। तुम्हारी अधिकतर कठिनाइयां भय से आती है। वास्तव में, ९० प्रतिशत बीमारियां शरीर के अवचेतन भय…

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एकांतवास

मेरे अनुभव के अनुसार तो जब लोग एकान्तवास करते हैं तो तमस् में जा गिरते हैं । संदर्भ : माताजी…

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नयी आशा की उत्पत्ति

हमारे युग में सफलता और उससे मिलने वाली भौतिक तुष्टि का ही मूल्य है। फिर भी असन्तुष्ट लोगों की हमेशा…

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आशाएँ

हमेशा ऊँचे उड़े चलो, दूर-दूर चलते चलो, बिना हिचके चलो। आज की आशाएँ कल की सिद्धियाँ होगी। संदर्भ : माताजी…

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कैसी वृत्ति ?

वर्तमान बढ़ते हुए संघर्ष में हमारी वृत्ति कैसी होनी चाहिये? ‘भागवत कृपा’ में श्रद्धा और पूर्ण विश्वास । सन्दर्भ :…

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पाप

पाप संसार की चीज़ है, योग की नहीं। संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)

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