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श्रीअरविंद और श्रीमाँ का संसार

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माताजी के वचन भाग-१

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निराशा से दूर रहो
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निराशा से दूर रहो

by श्री माँ 2 सप्ताह ago2 सप्ताह ago
मिथ्यात्व
370

मिथ्यात्व

by श्री माँ 4 सप्ताह ago4 सप्ताह ago
  • 720
    श्रीअरविंद आश्रम की श्री माँ
    श्री माँ के वचन

    प्रथम अतिमानसिक अवतरण

    (आश्रम के क्रीड़ांगण में २९ फरवरी १९५६ को बुधवार के सार्वजनिक ध्यान के समय) आज की सांझ तुम लोगों के बीच भगवान् की ठोस और...

    श्री माँ
    by श्री माँ 5 वर्ष ago5 वर्ष ago
  • 310
    श्री माँ के वचन

    अनुशासन की अनिवार्यता

    सामुदायिक जीवन में अनिवार्य रूप से अनुशासन होना चाहिये ताकि मजबूत कमजोर के साथ दुर्व्यवहार न कर सके; और जो भी उस समुदाय में रहना...

    श्री माँ
    by श्री माँ 7 वर्ष ago7 वर्ष ago
  • 1960
    अखंड भारत का नक्शा श्रीअरविंद आश्रम
    श्री माँ के वचन

    भारत के विषय में

    भारत को जगत् का आध्यात्मिक नेता होना ही चाहिये । अन्दर तो उसमें क्षमता है, परन्तु बाहर… अभी तो सचमुच जगत् का आध्यात्मिक नेता बनने...

    श्री माँ
    by श्री माँ 7 वर्ष ago7 वर्ष ago
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    अखंड भारत का नक्शा श्रीअरविंद आश्रम
    श्री माँ के वचन

    देशभक्ति की भावना तथा योग

    देशभक्ति की भावनाएँ हमारे योग की विरोधी बिलकुल नहीं हैं, बल्कि अपनी मातृभूमि की शक्ति तथा अखंडता के लिए संकल्प करना एकदम न्यायसंगत भावना है।...

    श्री माँ
    by श्री माँ 7 वर्ष ago7 वर्ष ago
  • 170
    श्रीअरविंद का चित्र
    श्री माँ के वचन

    श्रीअरविंद का कार्य

    मनुष्य बीते कल की सृष्टि है । श्रीअरविंद आगामी कल की सृष्टि – अतिमानसिक सत्ता के आने – की घोषणा करने आये थे । संदर्भ...

    श्री माँ
    by श्री माँ 7 वर्ष ago7 वर्ष ago
  • 430
    तुम्हारे प्रति जो हमारे प्रभु के भौतिक आवरण रहे हो, तुम्हारे प्रति हमारा असीम आभार है । तुमने हमारे लिए इतना कुछ किया, हमारे लिए कर्म किया, संघर्ष किये, कष्ट झेले, आशा की, इतना सहन किया, तुमने हम सबके लिए संकल्प किये, प्रयत्न किये, तैयार किया, हमारे लिए सब कुछ प्राप्त किया, तुम्हारे आगे हम नतमस्तक हैं और यह प्रार्थना करते हैं कि हम एक क्षण के लिए भी कभी तुम्हारे ऋण को न भूलें ।-श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    श्रीअरविंद का शरीर

    जब मैंने उनसे (८ दिसम्बर १९५०) को अपने शरीर को पुनर्जीवित करने के लिए कहा, तो उन्होने स्पष्ट उत्तर दिया : “मैंने जान-बूझकर यह शरीर...

    श्री माँ
    by श्री माँ 7 वर्ष ago7 वर्ष ago
  • 440
    श्रीअरविंद की उपस्थिती
    श्री माँ के वचन

    श्रीअरविंद की उपस्थिती

    श्रीअरविंद निरंतर हमारे साथ हैं और जो लोग उन्हें देखने और सुनने के लिए तैयार हैं उनके आगे अपने – आपको प्रकट करते हैं ।...

    श्री माँ
    by श्री माँ 7 वर्ष ago7 वर्ष ago
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    है प्रभो, आज प्रातः तूने मुझे यह आभासन दिया हैं कि जब तक तेरा कार्य संपन्न नहीं हो जाता, तब तक तू हमारे साथ रहेगा, केवल एक चेतना के रूप में ही नहीं जो पथप्रदर्शन करती और प्रदीप्त करती हैं बल्कि कार्यरत एक गतिशील ' उपस्थिति' के रूप में भी । तूने अचूक शब्दों में वचन दिया हैं कि तेरा सर्वांश यहां विध्यमान रहेगा और पार्थिव वातावरण को तब तक न छोड़ेगा जब तक पृथ्वी का रूपान्तर नहीं हो जायेगा । वर दे कि हम इस अद्भुत 'उपस्थिति' के योग्य बन सकें, अब सें हमारे अन्दर की प्रत्येक वस्तु तेरे उदात्त कार्य को पूर्ण करने हेतु अधिकाधिक परिपूर्णता से समर्पित होने के एकमात्र संकल्प पर एकाग्र हो । -श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    श्रीअरविंद का शरीर त्याग

    श्रीअरविंद ने अपना शरीर परम निस्वार्थता की क्रिया में त्यागा है। उन्होने अपने शरीर की उपलब्धियों को इसलिए त्यागा कि सामूहिक उपलब्धि का मुहूर्त आ...

    श्री माँ
    by श्री माँ 8 वर्ष ago8 वर्ष ago
  • 190
    श्रीअरविंद का अंतिम दर्शन
    श्री माँ के वचन

    श्रीअरविंद की महासमाधि – श्रीमाँ (२)

    शोक करना श्रीअरविंद का अपमान है, वे हमारे साथ सचेतन और जीवित रूप में विध्यमान है । संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-१)

    श्री माँ
    by श्री माँ 8 वर्ष ago8 वर्ष ago
  • 180
    श्रीअरविंद की महासमाधि के विषय में
    श्री माँ के वचन

    श्रीअरविंद की महासमाधि – श्रीमाँ

    हे प्रभों, आज प्रात: तूने मुझे यह आश्वासन दिया है कि जब तक तेरा कार्य सम्पन्न नहीं हो जाता, तब तक तू हमारे साथ रहेगा,...

    श्री माँ
    by श्री माँ 8 वर्ष ago8 वर्ष ago

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  • स्थायी अचंचलता

    स्थायी अचंचलता

  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    शांति मंत्र

    शांति मंत्र

  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    घर और काम में साधना

    घर और काम में साधना

  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    अपात्रता का भाव

    अपात्रता का भाव

  • श्रीअरविंद आश्रम की श्री माँ
    दो चीज़ें

    दो चीज़ें

  • श्रीअरविंद आश्रम की श्री माँ
    कभी मत बुड़बुड़ाओ

    कभी मत बुड़बुड़ाओ

  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    सचेतन अभीप्सा की अवस्था

    सचेतन अभीप्सा की अवस्था

  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    आंतरिक परिवर्तन

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  • महर्षि श्रीअरविंद का चित्र
    भागवत तत्त्व आवश्यक वस्तुओं को लिये चलता है

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    निराशा से दूर रहो

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ कक्षा लेते हुए
    क्या बच्चो को सज़ा देनी चाहिये?

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    सच्चा सुख कब ?

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  • श्रीमाँ का चित्र
    तेरा आश्वासन

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  • श्रीअरविंद का चित्र
    आध्यात्मिक जीवन में सफलता

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    प्रार्थना

    प्रार्थना

  • श्रीअरविंद का चित्र
    समग्र योग का अर्थ

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्रद्धा के नेत्र

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    माताजी की शक्ति

    माताजी की शक्ति

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