भगवान की सेवा
भगवान की सेवा से बढ़ कर और कोई हर्ष नहीं हो सकता। संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)
भगवान की सेवा से बढ़ कर और कोई हर्ष नहीं हो सकता। संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)
मनुष्य को भगवान पर भरोसा रखना, उन पर निर्भर होना चाहिए और साथ-साथ कोई उपयुक्त बनाने वाली साधना करनी चाहिये – भगवान साधना के अनुपात...
मधुर माँ, क्या हमारा प्राण केवल कामनाओं, स्वार्थपूर्ण भावनाओं आदि से ही बना है उसमें कुछ अच्छी चीज़ें भी हैं? ऊर्जा, बल, उत्साह, कलात्मक रुचि,...
भगवान स्वयं मार्ग पर चल कर मनुष्यों को राह दिखाने के लिए मनुष्य का रूप धारण करते हैं और बाहरी मानव-प्रकृति को स्वीकार करते हैं।...
भगवान हमेशा तुम्हारें हृदय में आसीन होते हैं , सचेतन रूप से जीवित रहते है । संदर्भ : माताजी के वचन (भाग -२)
… यदि किसी में बिलकुल ही कोई ज्ञान न हो पर भागवत कृपा पर भरोसा हो, यदि उसमें यह श्रद्धा हो कि इस जगत में...
भगवान जब बुरी-से-बुरी परीक्षा लेते हैं तब वह अच्छे-से-अच्छा पथ दिखाते हैं, जब वह कठोरतापूर्वक दण्ड देते है तब वह संपूर्णतः प्रेम करते हैं, जब...
भगवान के शब्द सहारा देते और आशीर्वाद देते हैं, सहलाते और प्रकाश देते हैं, और भगवान के उदार हस्त अनंत ज्ञान को ढकने वाले पर्दे...
वास्तव में भगवान वही हैं जिनकी गहराई में तुम अभीप्सा करते हो । संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)
भगवान हमेशा हर सच्ची अभीप्सा का उत्तर देते है और उन्हें पूरे हृदय के साथ जो कुछ दिया जाये उसे लेने से कभी इन्कार नहीं...