केवल मां की ओर ताको
किसी भी साधक को कभी भी अयोग्यता के और निराशाजनक विचारों नहीं पोसना चाहिये-ये एकदम से असंगत होते हैं, क्योंकि व्यक्ति की निजी योग्यता तथा...
किसी भी साधक को कभी भी अयोग्यता के और निराशाजनक विचारों नहीं पोसना चाहिये-ये एकदम से असंगत होते हैं, क्योंकि व्यक्ति की निजी योग्यता तथा...
साहस और प्रेम ही अनिवार्य गुण हैं ; और सब गुण यदि धुँधले या निस्तेज पड़ जायें फिर भी ये दोनों आत्मा को जीवित रखेंगे।...
प्रेम और स्नेह की प्यास मानव आवश्यकता है, परंतु वह तभी शांत हो सकती है जब वह भगवान की ओर अभिमुख हो। जब तक वह...
प्यारी माँ, आपका प्रेम ही मेरे लिए सच्चा आश्रय और बल है। माँ, मैं आपको जो कुछ अर्पित करता हूँ वह एक गंदला मिश्रण है...
प्रेम केवल एक ही है – ‘भागवत प्रेम’ ; और उस ‘प्रेम’ के बिना कोई सृष्टि न होती। सब कुछ उसी ‘प्रेम’ के कारण विद्यमान...
एकमात्र चीज़ जो महत्वपूर्ण हैं, एकमात्र चीज़ जिसका मूल्य है, वह है ‘तेरे’ साथ आधिकाधिक पूरी तरह से तदात्म होने की इच्छा, हमारी चेतना को...
तुम अकेलापन इसलिए लगता है क्योंकि तुम प्रेम पाने की आवश्यकता का अनुभव करते हो । बिना मांग किये, केवल प्रेम के आनंद के लिए...
‘सच्चा प्रेम’ जो तृष्टि और आलोकित करता है, वह नहीं है जिसे तुम पाते हो, बल्कि वह है जो तुम देते हो। और ‘परम प्रेम...
भगवान के लिए सच्चा प्रेम है आत्मदान, यानी अपने-आपको पूर्ण रूप से दे देना । इस दान में कोई मांग न हो, यह पूरी तरह...
श्रीअरविंद हमसे कहते हैं कि सभी परिस्थितियों में प्रेम को विकीरत करते रहना ही देवत्व का लक्षण है, वह उसे भी प्यार करता है जो...