प्रार्थना और ध्यान

नमन

मेरे मौन और विनम्र पूजा-भाव के साथ प्रणाम ... । मैं तेरी महिमा के आगे नमन करती हूँ क्योंकि वह…

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श्रीमाँ की प्रार्थना

हे सर्वसत्तासंपन्न सामर्थ्य, हे विजयी शक्ति, शुद्धि, सौन्दर्य, परम प्रेम, वर दे कि अपनी पूर्णता में यह सत्ता , अपनी…

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तेरी नयी अभिव्यक्ति

... मैं सभी वस्तुओं में प्रवेश करती हूँ, प्रत्येक परमाणु के हृदय में निवास करते हुए मैं वहाँ उस अग्नि…

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सरलता

जैसे ही किसी अभिव्यक्ति से समस्त प्रयास लुप्त हो जाता है, सारी चीज़ बहुत सरल हो जाती है, खिलते हुए…

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प्रार्थना

हे प्रभो, प्रेम के मधुर स्वामी, तू हमें अन्धकार में से बाहर निकालता है ताकि हम चेतना की ओर जागें,…

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नीरवता के कुछ क्षण

'तेरे' आगे नीरवता में बीते कुछ क्षण आनंद की शताब्दियों के बराबर हैं। ... ओह ! कितना मधुर है नीरवता…

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श्रीमाँ की प्रार्थना

हे तू, एकमात्र परम सद्वस्तु, हमारे प्रकाश के प्रकाश और हमारे जीवन के जीवन, हे परम प्रेम, हे संसार के…

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सचेतन संपर्क

हर उपस्थित व्यक्ति के साथ सचेतन संपर्क स्थापित कर लेने के बाद मैं 'परम प्रभु' के साथ एक हो जाती…

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तेरी सेवा

गहरे और मौन निदीध्यासन या लिखित या अलिखित ध्यान की जगह हमें हर क्षण की क्रियाशीलता में तेरी सेवा करनी…

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प्रार्थना

हे प्रभों, तू मेरा आश्रय और मेरा वरदान है, मेरा बल, मेरा स्वस्थ्य, मेरी आशा और मेरा साहस है ।…

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