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श्रीअरविंद और श्रीमाँ का संसार

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श्री माँ के वचन

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आत्मसमर्पण
260

आत्मसमर्पण

by श्री माँ 5 घंटे ago14 घंटे ago
अपना मार्ग खोजना
270

अपना मार्ग खोजना

by श्री माँ 2 दिन ago2 दिन ago
  • 150
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    नयी चीज़ का डर

    मधुर माँ, हम प्रायः कोई नयी चीज़ करने से डरते हैं, शरीर नये तरीके से क्रिया करने से इंकार करता हैं, जैसे जिम्नास्टिक में कोई...

    ऑरोदुनिया
    by ऑरोदुनिया 7 वर्ष ago7 वर्ष ago
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    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    भगवान के प्रति उत्सर्ग

    मधुर माँ,     आपने बहुत बार कहा है कि हमारे क्रिया-कलाप भगवान के प्रति उत्सर्ग होने चाहियें । इसका ठीक-ठीक अर्थ क्या है और...

    श्री माँ
    by श्री माँ 7 वर्ष ago7 वर्ष ago
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    तुम्हारे प्रति जो हमारे प्रभु के भौतिक आवरण रहे हो, तुम्हारे प्रति हमारा असीम आभार है । तुमने हमारे लिए इतना कुछ किया, हमारे लिए कर्म किया, संघर्ष किये, कष्ट झेले, आशा की, इतना सहन किया, तुमने हम सबके लिए संकल्प किये, प्रयत्न किये, तैयार किया, हमारे लिए सब कुछ प्राप्त किया, तुम्हारे आगे हम नतमस्तक हैं और यह प्रार्थना करते हैं कि हम एक क्षण के लिए भी कभी तुम्हारे ऋण को न भूलें ।-श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    श्रीअरविंद का शरीर

    जब मैंने उनसे (८ दिसम्बर १९५०) को अपने शरीर को पुनर्जीवित करने के लिए कहा, तो उन्होने स्पष्ट उत्तर दिया : “मैंने जान-बूझकर यह शरीर...

    श्री माँ
    by श्री माँ 7 वर्ष ago7 वर्ष ago
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    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    रात की यादें

    यदि मस्तिष्क सर्वदा काम करता रहता है तो रात भर में जो कुछ घटित होता है वह हमें क्यों नहीं याद रहता ? क्योंकि चेतना...

    श्री माँ
    by श्री माँ 7 वर्ष ago7 वर्ष ago
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    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    मन की कट्टरता

    आध्यात्मिक भाव पूजा, भक्ति और निवेदन के धार्मिक भाव के विपरीत नहीं है, धर्म में जो गलत है वह है मन की कट्टरता जो किसी...

    श्री माँ
    by श्री माँ 7 वर्ष ago7 वर्ष ago
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    श्रीअरविंद की उपस्थिती
    श्री माँ के वचन

    श्रीअरविंद की उपस्थिती

    श्रीअरविंद निरंतर हमारे साथ हैं और जो लोग उन्हें देखने और सुनने के लिए तैयार हैं उनके आगे अपने – आपको प्रकट करते हैं ।...

    श्री माँ
    by श्री माँ 7 वर्ष ago7 वर्ष ago
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    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    परात्पर भगवान

    जो श्रद्धा वैश्व भगवान के प्रति जाती है वह लीला की आवश्यकताओं के कारण अपनी क्रियाशक्ति में सीमित रहती है। इन सीमाओं से पूरी तरह...

    श्री माँ
    by श्री माँ 7 वर्ष ago7 वर्ष ago
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    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    सत्य को जीना

    सत्य लकीर की तरह नहीं सर्वांगीड है, वह उतरोत्तर नहीं बल्कि समकालिक है। अतः उसे शब्दो में व्यक्त नहीं किया जा सकता उसे जीना होता...

    श्री माँ
    by श्री माँ 7 वर्ष ago7 वर्ष ago
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    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ का चित्र
    श्री माँ के वचन

    व्यवस्था

    काम में व्यवस्था और सामंजस्य होने चाहियें। जो काम यूं देखने में बिलकुल नगण्य हो उसे भी पूर्ण पूर्णता के साथ, सफाई, सुंदरता, सामंजस्य और...

    श्री माँ
    by श्री माँ 7 वर्ष ago7 वर्ष ago
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    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    प्रकृति का विधान

    प्रकृति का ऐसा कोई विधान नहीं हैं जिसका अतिक्रमण न किया जा सके या जिसे बदला न जा सके, केवल हमारे अंदर यह विश्वास होना...

    श्री माँ
    by श्री माँ 7 वर्ष ago7 वर्ष ago

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3 conditions of yoga auroville bases of yoga Mirra Alfassa Priti Das Gupta Sri Aurobindo Ashram sri aurobindo The Mother The Mother of Sri Aurobindo Ashram Pondicherry The Mother on Sports अध्यात्मिकता आंरोंविल आश्वासन कृपा निद्रा और स्वप्न पूर्ण योग प्रीति दास गुप्ता भागवत उपस्थिती भारत के लिये संदेश माताजी की झाकियां माताजी के वचन भाग-१ माताजी के वचन भाग-२ माताजी के वचन भाग - ३ माताजी के विषय में मातृवाणी योग योग समन्वय यौवन वयवहारिक ज्ञान साधकों के लिये विचार और सूत्र के प्रसंग में विश्वास व्यावहारिक ज्ञान साधकों के लिये शिक्षा के ऊपर श्रद्धा श्री अरविंद श्रीअरविंद श्रीअरविंद के वचन श्री अरविद श्री माँ श्री माँ अपने बारे में श्री माँ के बारें में श्री माँ के बारे में श्री माँ के संस्मरण श्री माँ शरीर के बारें में साधना साधना के संकेत श्री माँ द्वारा
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    आत्मसमर्पण

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    माताजी का घेरा

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    प्रार्थना

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    खेल-प्रतियोगिताएं और प्रगति

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