श्री माँ के वचन

श्रीमाँ का संदेश

११ अप्रैल १९७३ . . . माँ, दर्शन के लिए आपको हमें एक संदेश देना है (२४ अप्रैल का दर्शन)…

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सच्ची धार्मिक भावना

. . . बहुत कम लोग हैं, बहुत ही कम, उनकी संख्या न के बराबर है, जो सच्ची धार्मिक भावना…

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अच्छी नींद के लिए

अंदर की बेचैनी ही तुम्हें आंतरिक और बाह्य रूप से नींद लेने से रोकती हैं। अच्छी नींद के लिए मन,…

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अनमोल उपहार

किसी बच्चे को देने-लायक़ सबसे अनमोल उपहार है उसमें सीखने के लिए ललक पैदा करना, हमेशा और हर जगह सीखते…

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परम ज्योति

पूर्ण अचेतनता नाम की कोई चीज़ नहीं है - नितान्त अज्ञान जैसी, निपट रात जैसी कोई चीज़ नहीं। समस्त अवचेतनता…

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कथनी नहीं

कथनी नहीं - करनी । संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)

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काम करने का सही तरीक़ा

काम में व्यवस्था और सामंजस्य होने चाहियें। जो काम यूँ देखने में बिलकुल नगण्य हो उसे भी पूर्ण पूर्णता के…

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नयी चीज़ का डर

मधुर माँ, हम प्रायः कोई नयी चीज़ करने से डरते हैं, शरीर नये तरीके से क्रिया करने से इंकार करता…

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भगवान के प्रति उत्सर्ग

मधुर माँ,     आपने बहुत बार कहा है कि हमारे क्रिया-कलाप भगवान के प्रति उत्सर्ग होने चाहियें । इसका…

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श्रीअरविंद का शरीर

जब मैंने उनसे (८ दिसम्बर १९५०) को अपने शरीर को पुनर्जीवित करने के लिए कहा, तो उन्होने स्पष्ट उत्तर दिया…

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