पूर्ण अचेतनता नाम की कोई चीज़ नहीं है – नितान्त अज्ञान जैसी, निपट रात जैसी कोई चीज़ नहीं। समस्त अवचेतनता के पीछे, समस्त अज्ञान के पीछे , रात्रि के पीछे सर्वदा ही परम ‘ज्योति’ विध्यमान है जो सर्वत्र है। अत्यंत छोटी – सी चीज़ भी सम्पर्क स्थापित करने का प्रारम्भ करने के लिए पर्याप्त है ।

संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड-१७)

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