श्री माँ के वचन

समस्त धन-सम्पदा

समस्त धन-सम्पदा भगवान् की है, भगवान् उसे जीवित प्राणियों को उधार देते है और स्वभावत: उसे उन्हें भगवान् के पास…

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समय की परवाह नहीं

तुम्हें जो चीज जाननी चाहिए वह है, ठीक तरह से यह जानना कि तुम जीवन में क्या करना चाहते हो|…

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श्रीअरविंद की उपस्थिति

श्रीअरविन्द निरन्तर हमारे साथ हैं और जो लोग उन्हें देखने और सुनने के लिए तैयार हैं उनके आगे अपने- आपको…

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कौन योग्य और कौन अयोग्य ?

​'भागवत कृपा' के सामने कौन योग्य है और कौन अयोग्य ?   सभी तो उसी एक दिव्य 'मां' के बालक…

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श्रीमाँ और श्रीअरविंद की पुस्तकें पढ़ने का सही तरीका

मधुर मां, हमें आपकी और श्रीअरविन्द की पुस्तकें कैसे पढ़नी चाहिये ताकि वे मन द्वारा समझे जाने की जगह हमारी चेतना…

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भारत का मानचित्र

("माताजी के भारत के मानचित्र" के बारे में जो आश्रम के क्रीड़ांगड़) यह सब तरह के अस्थायी रूपों के बावजूद…

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अतिमानस की स्थायी उपस्थिती

जब अतिमानस दैहिक मन में अभिव्यक्त होगा, केवल तभी उसकी उपस्थिती स्थायी हो सकती है । संदर्भ : माताजी के…

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नयी स्थिति

मुझे लगता है कि हम तेरे मंदिर के गर्भगृह के हृदय में जा पहुंचे हैं और तेरी ही इच्छा के…

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एकांतवास

मेरे अनुभव के अनुसार तो जब लोग एकान्तवास करते हैं तो तमस् में जा गिरते हैं । संदर्भ : माताजी…

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दुःख-कष्ट का रहस्य

बिलकुल स्वाभाविक रूप से हम अपने-आपसे पूछते हैं कि वह कौनसा रहस्य है जहां पीड़ा हमें ले जाती है। एक…

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