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श्री माँ

Posted by श्री माँ

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    श्रीअरविंद की उपस्थिती
    श्री माँ के वचन

    श्रीअरविंद की उपस्थिती

    श्रीअरविंद निरंतर हमारे साथ हैं और जो लोग उन्हें देखने और सुनने के लिए तैयार हैं उनके आगे अपने – आपको प्रकट करते हैं ।...

    श्री माँ
    by श्री माँ 7 वर्ष ago7 वर्ष ago
  • 190
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    परात्पर भगवान

    जो श्रद्धा वैश्व भगवान के प्रति जाती है वह लीला की आवश्यकताओं के कारण अपनी क्रियाशक्ति में सीमित रहती है। इन सीमाओं से पूरी तरह...

    श्री माँ
    by श्री माँ 7 वर्ष ago7 वर्ष ago
  • 170
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    सत्य को जीना

    सत्य लकीर की तरह नहीं सर्वांगीड है, वह उतरोत्तर नहीं बल्कि समकालिक है। अतः उसे शब्दो में व्यक्त नहीं किया जा सकता उसे जीना होता...

    श्री माँ
    by श्री माँ 7 वर्ष ago7 वर्ष ago
  • 290
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ का चित्र
    श्री माँ के वचन

    व्यवस्था

    काम में व्यवस्था और सामंजस्य होने चाहियें। जो काम यूं देखने में बिलकुल नगण्य हो उसे भी पूर्ण पूर्णता के साथ, सफाई, सुंदरता, सामंजस्य और...

    श्री माँ
    by श्री माँ 7 वर्ष ago7 वर्ष ago
  • 450
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    प्रकृति का विधान

    प्रकृति का ऐसा कोई विधान नहीं हैं जिसका अतिक्रमण न किया जा सके या जिसे बदला न जा सके, केवल हमारे अंदर यह विश्वास होना...

    श्री माँ
    by श्री माँ 8 वर्ष ago8 वर्ष ago
  • 230
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    भय को उठा फेंको

    प्यारी माताजी, मुझे सर्दी हो गयी है, क्या मैं रोज़ की तरह स्नान करूँ ? जो तुम्हें पसंद हो करो, इसका बहुत महत्व नहीं है;...

    श्री माँ
    by श्री माँ 8 वर्ष ago8 वर्ष ago
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    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    क्या तुम सुरक्षित हो ?

    कोई आसक्ति न हो, कोई कामना न हो, कोई आवेग न हो, कोई पसंद न हो; पूर्ण समता हो, अचल शांति हो और भागवत सरंक्षण...

    श्री माँ
    by श्री माँ 8 वर्ष ago8 वर्ष ago
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    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    बेचैनी से बाहर निकालने का उपाय

    हर बार जब तुम बेचैन होओ तो तुम्हें दोहराना चाहिये – बाह्य ध्वनि के बिना अपने भीतर बोलते हुए और साथ-साथ मेरा स्मरण करते हुए...

    श्री माँ
    by श्री माँ 8 वर्ष ago8 वर्ष ago
  • 480
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ का चित्र
    श्री माँ के वचन

    वस्तुओं को देखने का नजरिया

    साधारण रूप से, सामान्य मनुष्य में भौतिक, शारीरिक चेतना चीजों को वैसे नहीं देखती जैसी कि वे वस्तुतः है , यह तीन कारणों से है...

    श्री माँ
    by श्री माँ 8 वर्ष ago7 वर्ष ago
  • 290
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    हँसते रहो

    व्यक्ति को हमेशा हँसना चाहिये, हमेशा। ‘प्रभु’ हँसते है और हँसते रहते हैं। ‘उनका’ हास्य इतना अच्छा है, इतना अच्छा है, प्रेम से इतना परिपूर्ण...

    श्री माँ
    by श्री माँ 8 वर्ष ago8 वर्ष ago

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3 conditions of yoga auroville bases of yoga Mirra Alfassa Priti Das Gupta Sri Aurobindo Ashram sri aurobindo The Mother The Mother of Sri Aurobindo Ashram Pondicherry The Mother on Sports अध्यात्मिकता आंरोंविल आश्वासन कृपा निद्रा और स्वप्न पूर्ण योग प्रीति दास गुप्ता भागवत उपस्थिती भारत के लिये संदेश माताजी की झाकियां माताजी के वचन भाग-१ माताजी के वचन भाग-२ माताजी के वचन भाग - ३ माताजी के विषय में मातृवाणी योग योग समन्वय यौवन वयवहारिक ज्ञान साधकों के लिये विचार और सूत्र के प्रसंग में विश्वास व्यावहारिक ज्ञान साधकों के लिये शिक्षा के ऊपर श्रद्धा श्री अरविंद श्रीअरविंद श्रीअरविंद के वचन श्री अरविद श्री माँ श्री माँ अपने बारे में श्री माँ के बारें में श्री माँ के बारे में श्री माँ के संस्मरण श्री माँ शरीर के बारें में साधना साधना के संकेत श्री माँ द्वारा
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    सत्य की शक्ति

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    वर्षों का भार

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    सच्ची पराजय

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    कुछ भी असंभव नहीं

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    माताजी की ओर खुलना

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    विनम्रता

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    विनम्र बनने का गलत तरीका

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    आध्यात्मिक जीवन की बाधा

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    मैं तुम्हारे साथ हूं

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    सतत ‘उपस्थिती’

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  • महाप्रभु श्रीअरविंद घोष
    आत्मा का अनुगमन

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    पूंजीवाद

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  • स्थायी अचंचलता

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    शांति मंत्र

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    घर और काम में साधना

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    अपात्रता का भाव

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    दो चीज़ें

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्री माँ
    कभी मत बुड़बुड़ाओ

    कभी मत बुड़बुड़ाओ

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