विजय की प्राप्ति
विजय की प्राप्ति न केवल बलिदान से, न त्याग से, न ही निर्बलता से होती है। वह केवल ऐसे दिव्य ‘आनन्द’ द्वारा मिलती है जो...
विजय की प्राप्ति न केवल बलिदान से, न त्याग से, न ही निर्बलता से होती है। वह केवल ऐसे दिव्य ‘आनन्द’ द्वारा मिलती है जो...
(भय पर श्रीअरविन्द के एक सूत्र के बारे में बतलाते हुए श्रीमां ने कहा : ) …उन लोगों को भी, जिन लोगों का भाग्य सुनिश्चित...
मधुर मां, अन्तरात्मा की क्या भूमिका है? अन्तरात्मा के बिना तो हमारा अस्तित्व ही न होगा! अन्तरात्मा वह है जो कभी भी भगवान् को...
प्रकृति में एक ऊपर उठने वाला विकास है जो पत्थर से पौधों में और पौधे से पशु में तथा पशु से मनुष्य में उठता है,...
केवल दुर्बल लोग ही उत्तेजित रहते हैं, जैसे ही कोई सचमुच प्रबल बन जाता है वह शांतिपूर्ण, स्थिर, अचंचल बन जाता है, और उसमें प्रतिकूल...
आध्यात्मिकता शक्तियाँ अचंचलता, शांति और नीरवता में काम करती है। सारी हलचल और उत्तेजना विरोधी प्रभाव से आती है । संदर्भ : माताजी के वचन...
हे दिव्य और पूजनीय मां, ‘तेरी’ सहायता के साथ कौन-सी चीज असम्भव है? उपलब्धि का मुहूर्त निकट है और ‘तूने’ हमें अपनी सहायता का आश्वासन...
प्रकति में एक ऊपर उठने वाला विकास है जो पत्थर से पौधों में और पौधे से पशु में तथा पशु से मनुष्य में उठता है;...
हमें यादों से इतना स्नेह होता है क्योंकि वे सार्वभौमिक हैं। उनके अन्दर ‘अनन्तता’ के रस का कुछ अंश होता है। जिसे दैनिक घटनाओं में...