सत्य वृत्ति
सत्य वृत्ति है विश्वास की वृत्ति, आज्ञाकारिता की वृत्ति, निवेदन की वृत्ति । संदर्भ : प्रश्न और उत्तर १९५५
सत्य वृत्ति है विश्वास की वृत्ति, आज्ञाकारिता की वृत्ति, निवेदन की वृत्ति । संदर्भ : प्रश्न और उत्तर १९५५
आत्म-अनुशासन के बिना कोई जीवन सफल नहीं हो सकता । संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)
जब तुम भौतिक जीवन की कोई चीज़ बदलना चाहो, चाहे वह चरित्र हो या अंगो की संचालन-क्रिया हो या आदतें, तुम्हें स्थिर अध्यवसाय के साथ...
सच्ची बीमारी भय हैं । भय को दूर फेंक दो तो बीमारी चली जायेगी। संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-३)
ठीक करना और मिटाना, दोनों सम्भव हैं लेकिन दोनों हालतों में, यद्यपि अलग-अलग मात्रा में, स्वभाव और चरित्र के रूपान्तर की जरूरत होती है ।...
हमेशा भगवान की उपस्थिति में ही निवास करो; इस अनुभूति में रहो कि यह उपस्थिति ही तम्हारी प्रत्येक क्रिया को गति देती है और जो...
हमारा लक्ष्य न तो राजनीतिक है, न सामाजिक, वह आध्यात्मिक लक्ष्य है। हम जो चाहते हैं वह वैयक्तिक चेतना का रूपान्तर है, शासन या सरकार...
केवल एक ही चीज़ है जिसके बारे में मुझे पूरा विश्वास है, और वह है, मैं कौन हूँ। श्रीअरविंद भी यह जानते थे और उन्होने इसकी...
कोई आसक्ति न हो, कोई कामना न हो, कोई आवेग न हो, कोई पसन्द न हो; पूर्ण समता हो, अचल शान्ति हो और भागवत संरक्षण...
मेरे मौन और विनम्र पूजा-भाव के साथ प्रणाम … । मैं तेरी महिमा के आगे नमन करती हूँ क्योंकि वह अपनी सारी भव्यता के साथ...