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श्रीअरविंद और श्रीमाँ का संसार

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श्री माँ

Posted by श्री माँ

  • 230
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ के चरण
    श्री माँ के वचन

    अहंकार और अन्तरात्मा

    अहंकार उसके बारे में सोचता है जो उसके पास नहीं है और जिसे वह चाहता है। यही उसका निरन्तर  मुख्य काम है । अन्तरात्मा जानती...

    श्री माँ
    by श्री माँ 1 वर्ष ago1 वर्ष ago
  • 290
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ अपने कक्ष में
    श्री माँ के वचन

    स्वागत

    भागवत कृपा मौजूद है – अपने द्वार खोलो और उसका स्वागत करो। मेरे प्रेम और आशीर्वाद सहित । संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड-१६)

    श्री माँ
    by श्री माँ 1 वर्ष ago1 वर्ष ago
  • 740
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    सच्ची आध्यात्मिक अनुभूति

    मधुर माँ, आप अपने ‘वार्तालाप’ में कहती हैं कि हमें सच्ची आध्यात्मिक अनुभूति पाने के लिए डुबकी लगानी चाहिये। क्या उसे केवल अभीप्सा द्वारा पाना...

    श्री माँ
    by श्री माँ 1 वर्ष ago1 वर्ष ago
  • 200
    श्रीमाँ का दर्शन
    श्री माँ के वचन

    एकाग्रता कैसे बढ़ाए ?

    मधुर माँ, हम मन की एकाग्रता और इच्छा-शक्ति को कैसे बढ़ा सकते हैं? कुछ भी करने के लिए वे बहुत ज़रूरी हैं ? नियमित, अध्यवसायपूर्ण,...

    श्री माँ
    by श्री माँ 1 वर्ष ago1 वर्ष ago
  • 250
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    जीवन को रुचिकर कैसे बनाए ?

    सदा सीखना, बोद्धिक नहीं मनोवैज्ञानिक रूप से, स्वभाव में प्रगति करना, अपने अंदर गुण पैदा करना और दोष ठीक करना ताकि हर चीज़ हमें अज्ञान...

    श्री माँ
    by श्री माँ 1 वर्ष ago1 वर्ष ago
  • 220
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    कपट

    प्रश्न ) कपट को समाज की तरफ से इतना बढ़ावा क्यों मिलता है ? उ.) क्योंकि समाज पर सफलता की सनक सवार होती है ।...

    श्री माँ
    by श्री माँ 1 वर्ष ago1 वर्ष ago
  • 280
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    आध्यात्मिक आघात

    आघात और परीक्षाएँ हमेशा भागवत कृपा के रूप में हमें अपनी सत्ता में वे बिन्दु दिखाने आती हैं जहां हमारे अंदर कमी है और जिन...

    श्री माँ
    by श्री माँ 1 वर्ष ago1 वर्ष ago
  • 450
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ की टॉफी की कहानी
    श्री माँ के वचन

    सबसे उत्तम मार्ग

    संतुलन अनिवार्य है, जो पथ सावधानतापूर्वक विपरीत चरमावस्थाओं से बचता है वह अनिवार्य है, अत्यधिक जल्दबाज़ी खतरनाक है, अधैर्य आगे बढ्ने से तुम्हें रोकता है;...

    श्री माँ
    by श्री माँ 1 वर्ष ago1 वर्ष ago
  • 430
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    भगवान का उत्तर

    जब तुम ध्यान में बैठो तो तुम्हें बालक की तरह निष्कपट और सरल होना चाहिये। तुम्हारा बाह्य मन बाधा न दे, तुम किसी चीज़ की...

    श्री माँ
    by श्री माँ 1 वर्ष ago1 वर्ष ago
  • 380
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ का संदेश
    श्री माँ के वचन

    विश्वास

    जिसकी सचमुच जरूरत होगी, वह चीज़ अवश्य आयेगी । आशीर्वाद ! संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड-१६)

    श्री माँ
    by श्री माँ 1 वर्ष ago1 वर्ष ago

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3 conditions of yoga auroville bases of yoga Mirra Alfassa Priti Das Gupta Sri Aurobindo Ashram sri aurobindo The Mother The Mother of Sri Aurobindo Ashram Pondicherry The Mother on Sports अध्यात्मिकता आंरोंविल आश्वासन कृपा निद्रा और स्वप्न पूर्ण योग प्रीति दास गुप्ता भागवत उपस्थिती भारत के लिये संदेश माताजी की झाकियां माताजी के वचन भाग-१ माताजी के वचन भाग-२ माताजी के वचन भाग - ३ माताजी के विषय में मातृवाणी योग योग समन्वय यौवन वयवहारिक ज्ञान साधकों के लिये विचार और सूत्र के प्रसंग में विश्वास व्यावहारिक ज्ञान साधकों के लिये शिक्षा के ऊपर श्रद्धा श्री अरविंद श्रीअरविंद श्रीअरविंद के वचन श्री अरविद श्री माँ श्री माँ अपने बारे में श्री माँ के बारें में श्री माँ के बारे में श्री माँ के संस्मरण श्री माँ शरीर के बारें में साधना साधना के संकेत श्री माँ द्वारा
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    माताजी की ओर खुलना

    माताजी की ओर खुलना

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    विनम्रता

    विनम्रता

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    विनम्र बनने का गलत तरीका

    विनम्र बनने का गलत तरीका

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    आध्यात्मिक जीवन की बाधा

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    मैं तुम्हारे साथ हूं

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    सतत ‘उपस्थिती’

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  • महाप्रभु श्रीअरविंद घोष
    आत्मा का अनुगमन

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    पूंजीवाद

    पूंजीवाद

  • स्थायी अचंचलता

    स्थायी अचंचलता

  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    शांति मंत्र

    शांति मंत्र

  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    घर और काम में साधना

    घर और काम में साधना

  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    अपात्रता का भाव

    अपात्रता का भाव

  • श्रीअरविंद आश्रम की श्री माँ
    दो चीज़ें

    दो चीज़ें

  • श्रीअरविंद आश्रम की श्री माँ
    कभी मत बुड़बुड़ाओ

    कभी मत बुड़बुड़ाओ

  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    सचेतन अभीप्सा की अवस्था

    सचेतन अभीप्सा की अवस्था

  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    आंतरिक परिवर्तन

    आंतरिक परिवर्तन

  • महर्षि श्रीअरविंद का चित्र
    भागवत तत्त्व आवश्यक वस्तुओं को लिये चलता है

    भागवत तत्त्व आवश्यक वस्तुओं को लिये चलता है

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    निराशा से दूर रहो

    निराशा से दूर रहो

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