ध्यान कहाँ ?

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मधुर माँ,  यहाँ अपने कमरे में बैठ कर ध्यान करने और सबके साथ खेल के मैदान में ध्यान के लिए…

कुछ भी असंभव नहीं

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यदि चैत्य पुरुष की प्रकृति जाग्रत हो जाए, अपने पीछे विद्यमान माताजी की चेतना और शक्ति के द्वारा तुम्हारा पथ-प्रदर्शन…

रूपान्तर की अवस्थाएँ

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भागवत चेतना की विभिन्न अवस्थाएँ होती हैं। रूपांतर की भी विभिन्न अवस्थाएँ होती है। पहली है, चैत्य रूपांतर, जिसमें चैत्य…

ईर्ष्या और प्रमाद

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मधुर मां, हम ईर्ष्या और प्रमाद से कैसे पिण्ड छुड़ा सकते या उन्हें ठीक कर सकते हैं ? स्वार्थ तुम्हें…

रोगमुक्ति करने की शक्ति

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माँ, क्या अपने अन्दर रोगमुक्त करने की क्षमता विकसित करना सम्भव है? सिद्धान्त रूप में, सचेतन रूप से दिव्य शक्ति…

मार्ग की कठिनाइयाँ

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जो भी पूर्णता के मार्ग पर बढ़ना चाहता है उसे मार्ग में आने वाली कठिनाइयों के बारे में कभी शिकायत…

ध्यान में दो सामान्य कठिनाइयां

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मन हमेशा सक्रिय रहता है, किन्तु हमलोग पूरी तरह से यह नहीं देखते कि यह क्या कर रहा है, पर…

सम्भावना

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सभी जगह मनुष्यों और उनका स्वभाव एक ही होता है। लेकिन मैं उनके दोषों और दुर्बलताओं को नहीं देखती, मैं…

हमारी वास्तविक सत्ता तथा इसके यन्त्र

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मनुष्य अपनी वास्तविक प्रकृति में... एक आत्मा है जो मन, प्राण तथा शरीर का उपयोग व्यक्तिगत तथा सामुदायिक अनुभव के…

अच्छी आदतों का त्याग

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मधुर माँ , आपने लिखा है, "सब त्यागों में अपनी अच्छी आदतों को त्यागना सबसे कठिन है।" इससे आपका ठीक-ठीक…