तुम्हें अकेलापन इसलिये लगता है क्योंकि तुम्हें प्रेम की आवश्यकता मालूम होती है। बिना किसी मांग के प्रेम करना सीखो, केवल प्रेम के आनंद के लिये प्रेम करो , (प्रेम करना संसार का सबसे बड़ा आनंद है!) तब तुम्हें कभी अकेलापन न लगेगा।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग -२)
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