सांसारिक जीवन संघर्ष का जीवन है – इस पर उचित तरीके से चलने के लिए तुम्हें अपने जीवन तथा अपनी क्रियाएँ भगवान को समर्पित करनी चाहियें और अपने अंदर भगवान की शांति के लिए प्रार्थना करनी चाहिये। मन जब अचंचल हो जाता है, तब तुम यह अनुभव कर सकते हो कि दिव्य माँ तुम्हारे जीवन को सहारा दिये हुये हैं , और तब तुम सब कुछ उनके हाथों में सौंप दो।
संदर्भ : श्रीअरविंद के पत्र
उनके दुःख-दर्द से तीव्र रूप से पीड़ित होकर मैं तेरी ओर मुड़ी और उसका उपचार…
भागवत शक्ति को ग्रहण करने की क्षमता प्राप्त करने तथा तुम्हारे माध्यम से बाह्य जीवन…
यह कभी न भूलो कि तुम अकेले नहीं हो । भगवान् तुम्हारे साथ हैं, तुम्हारी…
जहाँ कहीं तुम एक महान अंत देखो, निश्चित हो जाओ कि एक महान आरंभ हो…
हमें यादों से इतना स्नेह होता है क्योंकि वे सार्वभौमिक हैं। उनके अन्दर 'अनन्तता' के…