सहते चलो और तुम्हारी विजय होगी। विजय सबसे अधिक सहनशील के हाथों में आती है।
और भागवत कृपा और भागवत प्रेम के साथ कुछ भी असम्भव नहीं है।
मेरी शक्ति और मेरा प्रेम तुम्हारे साथ हैं।
संघर्ष के अन्त में होती है ‘विजय’।
सन्दर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)
अंदर की बेचैनी ही तुम्हें आंतरिक और बाह्य रूप से नींद लेने से रोकती है।…
तुम्हें डरना नहीं चाहिये। तुम्हारी अधिकतर कठिनाइयां भय से आती है। वास्तव में, ९० प्रतिशत…
श्रीअरविंद ने कितनी ही बार इस बात को दोहराया है कि परमात्मा हास्यप्रिय हैं और…
अभीप्सा का तात्पर्य है, शक्तियों को पुकारना । जब शक्तियाँ प्रत्युत्तर दे देती हैं, तब…