श्रेणियाँ श्री माँ के वचन

युवकों को आह्वान

पहली शर्त है, अपने निजी हितों को लक्ष्य न बनाओ।

पहले गुण जिनकी जरूरत है वे हैं : बहादुरी, साहस और अध्यवसाय।

और फिर इस बारे में सचेतन होना कि तुम्हें जो जानना चाहिये उसकी तुलना में तुम कुछ भी नहीं जानते, तुम्हें जो करना चाहिये उसकी तुलना में तुम कुछ भी नहीं कर सकते, तुम्हें जो होना चाहिये उसकी तुलना में तुम कुछ भी नहीं हो।

तुम्हारी प्रकृति में जिस चीज की कमी है उसे प्राप्त करने के लिए, जो अभी तक तुम नहीं जानते उसे जानने के लिए, जो अभी तक तुम नहीं कर सकते उसे करने के लिए एक अपरिवर्तनशील संकल्प होना चाहिये।

निजी कामनाओं के अभाव से आने वाली ज्योति और शान्ति में तुम्हें सदा प्रगति करते रहना चाहिये।

तुम अपना कार्यक्रम बना सकते हो :

“हमेशा अधिक अच्छा और आगे ही आगे!”

और केवल एक ही लक्ष्य हो : भगवान को जानना ताकि उन्हें अभिव्यक्त कर सको।

दृढ़ बने रहो और तुम आज जो नहीं कर सकते उसे कल कर पाओगे।

संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड-१६)

शेयर कीजिये

नए आलेख

सच्ची वीरता

तुम पानी में गिर पड़ते हो। वह विपुल जलराशि तुम्हें भयभीत नहीं करती। तुम हाथ-पांव…

% दिन पहले

अच्छी नींद के लिए

अंदर की बेचैनी ही तुम्हें आंतरिक और बाह्य रूप से नींद लेने से रोकती है।…

% दिन पहले

भय और बीमारी

तुम्हें डरना नहीं चाहिये। तुम्हारी अधिकतर कठिनाइयां भय से आती है। वास्तव में, ९० प्रतिशत…

% दिन पहले

सच्ची करुणा

साधक को क्या होना चाहिये इसके बारे में मैं तुम्हारे भावों की कदर करती हूँ…

% दिन पहले

आशा

हमारी प्रकृति न केवल संकल्प और ज्ञान के क्षेत्र में प्रान्त है बल्कि शक्ति के…

% दिन पहले

परमात्मा हास्यप्रिय है

श्रीअरविंद ने कितनी ही बार इस बात को दोहराया है कि परमात्मा हास्यप्रिय हैं और…

% दिन पहले