मधुर माँ,
आपने मुझे आशीर्वाद दिया है कि मैं सत्य-जीवन में जन्म लूँ, लेकिन ऐसा जन्म लेने कि क्या शर्तें हैं और उन्हें कैसे पूरा किया जा सकता हैं ?
पहली शर्त है यह निश्चय करना कि आगे से तुम अपने लिए नहीं, एकांतिक रूप से भगवान के लिए जिओगे।
स्वभावतः, इस निश्चय को हर रोज़ नया किया जाये और सतत तथा प्रभावी संकल्प में प्रकट किया जाये।
संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड-१६)
तुम पानी में गिर पड़ते हो। वह विपुल जलराशि तुम्हें भयभीत नहीं करती। तुम हाथ-पांव…
अंदर की बेचैनी ही तुम्हें आंतरिक और बाह्य रूप से नींद लेने से रोकती है।…
तुम्हें डरना नहीं चाहिये। तुम्हारी अधिकतर कठिनाइयां भय से आती है। वास्तव में, ९० प्रतिशत…
श्रीअरविंद ने कितनी ही बार इस बात को दोहराया है कि परमात्मा हास्यप्रिय हैं और…