धरती पर जीवन तत्त्वतः प्रगति का क्षेत्र है लेकिन जो कुछ प्रगति करनी है उसके लिये जीवन कितना संक्षिप्त है!
अपनी तुच्छ कामनाओं को संतुष्ट करने में अपना समय बर्बाद करना निरी मूर्खता है । सच्चा सुख तभी मिल सकता है जब तुम भगवान् को पा लो।
सन्दर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड-१६)
समाजवादी चाहते हैं पूंजीवाद को खत्म करना, किन्तु ऐसा न करना बेहतर होगा। वे राष्ट्रीय…
जब चैत्य शरीर से विदा लेता है, अपने विश्राम-स्थल की ओर जाते हए मन और…
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सामान्य जीवन से बस व्याकुलताभरा असंतोष इस योग के लिए पर्याप्त तैयारी नहीं है। आध्यात्मिक…