सच्चाई का अर्थ है, अपनी सत्ता की सभी गतिविधियों को उस उच्चतम चेतना तथा उच्चतम सिद्धि तक उठाना जिन्हें पहले से ही प्राप्त कर लिया गया है।
सच्चाई हर एक से यही माँग करती है कि प्रत्येक अपनी समस्त सत्ता को – अपने सभी भागों तथा गतिविधियों के साथ – उस केंद्रीय भागवत इच्छा-शक्ति के साथ एकता तथा सामंजस्य में ढाले।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)
एक या दो बार, बस खेल-ही-खेलमें आपने अपनी या श्रीअरविंदकी कोई पुस्तक ली और सहसा…
मेरे प्यारे बालक, तुम हमेशा मेरी भुजाओं में रहते हो और मैं तुम्हें सुख-सुविधा देने,…