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श्री अरविन्द और श्री माँ के बीच भेद

​जब तुम अपने हृदय और विचार में मेरे ओर श्रीअरविन्द के बीच कोई भेद न करोगे, जब अनिवार्य रूप से श्रीअरविन्द के बारे में सोचना मेरे बारे में सोचना हो ओर मेरे बारे में सोचने का अर्थ हो श्रीअरविन्द के बारे में सोचना, जब एक को देखने का अनिवार्य अर्थ हो दूसरे को उसी एक ही अछिद्र व्यक्ति के रूप में देखना, तब तुम यह जान लोग कि तुम अतिमानसिक शक्ति और चेतना के प्रति खुलना शुरू कर रहे हो ।

सन्दर्भ : माताजी के वचन (भाग – १)

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