वे माँ के बालक हैं और उनके सबसे निकट हैं जो उनकी और उद्घाटित हैं, अपनी आंतरिक सत्ता में उनके समीप हैं, उनकी इच्छा के साथ एक हैं – वे नहीं जो भौतिक रूप से उनके सबसे निकट हैं ।
संदर्भ : माताजी के विषय में
अप्रिय विचार अप्रिय भावनाएं लाते हैं--अप्रिय भावनाएं तुम्हें भगवान् से दूर ले जाती हैं और…
भूल या सजा देने का कोई प्रश्न ही नहीं है-अगर लोगों को हम उनकी भूलों…
इन छोटी-छोटी बातों से क्यों उत्तेजित हो जाते हो? या उनसे अपने को क्यों विचलित…
जो श्रद्धा वैश्व भगवान के प्रति जाती है वह लीला की आवश्यकताओं के कारण अपनी…
भगवान मुझसे क्या चाहते है ? वे चाहते है कि पहले तुम अपने-आपको पा लो,…