यहाँ पर कुछ लोग आपको माताजी से महानतर क्यों मानते हैं ? क्या आप दोनों समान स्तर से नहीं हैं ? क्या मनुष्य की आँखों पर के पर्दा नहीं पड़ा है जो इस तरह के भेद करता है?
ये वे मन हैं जो केवल सतही चीजों को देखते हैं और उनके पीछे क्या है यह नहीं देख पाते ।
संदर्भ : माताजी के विषय में
एक या दो बार, बस खेल-ही-खेलमें आपने अपनी या श्रीअरविंदकी कोई पुस्तक ली और सहसा…
मेरे प्यारे बालक, तुम हमेशा मेरी भुजाओं में रहते हो और मैं तुम्हें सुख-सुविधा देने,…