यह कब कहा जा सकता है कि व्यक्ति आन्तरिक रूप से माँ की वाणी सुनने को तैयार है?
जब व्यक्ति के अन्दर समता, विवेक और पर्याप्त यौगिक अनुभूति हो – अन्यथा व किसी भी आवाज़ को माँ की वाणी मानने की भूल कर सकता है।
संदर्भ : माताजी के विषय में
एक या दो बार, बस खेल-ही-खेलमें आपने अपनी या श्रीअरविंदकी कोई पुस्तक ली और सहसा…
मेरे प्यारे बालक, तुम हमेशा मेरी भुजाओं में रहते हो और मैं तुम्हें सुख-सुविधा देने,…