काम में कठिनाइयाँ परिस्थितियों या बाहर की छोटी-मोटी घटनाओं से नहीं आती । वे आंतरिक वृत्ति की (विशेषकर प्राणिक वृत्ति की) किसी चीज़ से आती हैं जो गलत होती है – अहंकार, महत्वकांक्षा, काम के बारे में मानसिक धारणाओं की दृढ़ता आदि से आती हैं। यह ज़्यादा अच्छा है कि हमेशा असामंजस्य के कारण को किसी और या औरों में ढूँढने के जगह, उसे ठीक करने के लिए अपने अंदर ढूंढा जाये।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)
उनके दुःख-दर्द से तीव्र रूप से पीड़ित होकर मैं तेरी ओर मुड़ी और उसका उपचार…
भागवत शक्ति को ग्रहण करने की क्षमता प्राप्त करने तथा तुम्हारे माध्यम से बाह्य जीवन…
यह कभी न भूलो कि तुम अकेले नहीं हो । भगवान् तुम्हारे साथ हैं, तुम्हारी…
जहाँ कहीं तुम एक महान अंत देखो, निश्चित हो जाओ कि एक महान आरंभ हो…
हमें यादों से इतना स्नेह होता है क्योंकि वे सार्वभौमिक हैं। उनके अन्दर 'अनन्तता' के…