जो श्रद्धा वैश्व भगवान के प्रति जाती है वह लीला की आवश्यकताओं के कारण अपनी क्रियाशक्ति में सीमित रहती है।
इन सीमाओं से पूरी तरह छुटकारा पाने के लिए तुम्हें परात्पर भगवान तक पहुँचना चाहिये।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-३)
केवल थे सुरक्षित जिन्होने सँजोये रखा भगवान को अपने हृदय में अपने: साहस की ढाल…
क्या अपने-आपको बुरा-भला कहना प्रगति करने का अच्छा उपाय है ? अपने-आपको बुरा भला-भला…
मधुर माँ, हम स्वप्न में अच्छे और बुरे में कैसे फ़र्क़ कर सकते हैं। सिद्धांत…