श्रद्धा निश्चित रूप से हमें भागवत कृपा द्वारा दिया गया उपहार है। …
अपनी श्रद्धा की उसी तरह निगरानी करनी चाहिए जैसे कोई किसी अत्यधिक मूल्यवान वस्तु के जन्म के समय करता है और इसका उन सब चीजों से सावधानी के साथ बचाव करना चाहिए जो इसे हानि पहुंचा सकती है ।
संदर्भ : प्रश्न और उत्तर (१९५७-१९५८)
उनके दुःख-दर्द से तीव्र रूप से पीड़ित होकर मैं तेरी ओर मुड़ी और उसका उपचार…
भागवत शक्ति को ग्रहण करने की क्षमता प्राप्त करने तथा तुम्हारे माध्यम से बाह्य जीवन…
यह कभी न भूलो कि तुम अकेले नहीं हो । भगवान् तुम्हारे साथ हैं, तुम्हारी…
जहाँ कहीं तुम एक महान अंत देखो, निश्चित हो जाओ कि एक महान आरंभ हो…
हमें यादों से इतना स्नेह होता है क्योंकि वे सार्वभौमिक हैं। उनके अन्दर 'अनन्तता' के…