आज हमारी शिक्षा कौन – से दोषों और भ्रांतियों का शिकार है ? हम उनसे कैसे बच सकते हैं ?
१ . सफलता, आजीविका और धन को दिया जाने वाला प्रायः ऐकांतिक महत्व ।
२. ‘आत्मा’ के साथ संपर्क और सत्ता के ‘सत्य’ के विकास और उसकी अभिव्यक्ति की परम आवश्यकता पर ज़ोर देना ।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-१)
मैं तुम्हें अपना पुराना मन्त्र बताती हूं; यह बाह्य सत्ता को बहुत शान्त रखता है…
अगर अपात्रता का भाव तुम्हें उमड़ती हुई कृतज्ञता से भर देता है और आनन्दातिरेक के…
कभी मत बुड़बुड़ाओ । जब तुम बुड्बुड़ाते हो तो तुम्हारे अन्दर सब तरह की शक्तियां…