यदि सचमुच में हम, ठीक से जान सकें जीवन के उत्सव के हर विवरण को, भौतिक जीवन में प्रभु की पूजा को, तो यह आश्चर्य पूर्ण रूप से सुंदर होगा – जानना और पुनः भूल न करना, कभी भी फिर गलती न करना, उत्सव क्रिया को इतनी उत्तमता से करना जैसे यह एक दीक्षा हो।
संदर्भ : श्रीमाँ का एजेंडा
उनके दुःख-दर्द से तीव्र रूप से पीड़ित होकर मैं तेरी ओर मुड़ी और उसका उपचार…
भागवत शक्ति को ग्रहण करने की क्षमता प्राप्त करने तथा तुम्हारे माध्यम से बाह्य जीवन…
यह कभी न भूलो कि तुम अकेले नहीं हो । भगवान् तुम्हारे साथ हैं, तुम्हारी…
जहाँ कहीं तुम एक महान अंत देखो, निश्चित हो जाओ कि एक महान आरंभ हो…
हमें यादों से इतना स्नेह होता है क्योंकि वे सार्वभौमिक हैं। उनके अन्दर 'अनन्तता' के…