सभी तथाकथित मानव बुद्धिमत्ता की जटिलताओं के परे ‘भागवत कृपा’ की आलोकमयी सरलता कार्य करने के लिए प्रस्तुत है, यदि हम उसे कार्य करने दें। जीवन बिलकुल सरल और आसान हो सकता था अगर मनुष्य का मन उसमें इतनी सारी व्यर्थ की जटिलताएँ न डाल देता ।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…