श्रेणियाँ श्री माँ के वचन

व्यर्थ की जटिलताएँ

सभी तथाकथित मानव बुद्धिमत्ता की जटिलताओं के परे ‘भागवत कृपा’ की आलोकमयी सरलता कार्य करने के लिए प्रस्तुत है, यदि हम उसे कार्य करने दें। जीवन बिलकुल सरल और आसान हो सकता था अगर मनुष्य का मन उसमें इतनी सारी व्यर्थ की जटिलताएँ न डाल देता ।

संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)

शेयर कीजिये

नए आलेख

पवित्रता

केवल ईश्वर के ही प्रभाव से प्रभावित होना, और किसी के प्रभाव को स्वीकार न…

% दिन पहले

न कुछ शुभ,न कुछ अशुभ

किसी भी ग़लत गति को भूमिगत की जगह उसे निवेदित कर देना चाहिये। उस चीज़…

% दिन पहले

पथ पर डटे रहो

तुम सभी, मेरे बच्चो, मैं तुमसे यह कह सकती हूँ, मैंने यह कई बार दोहराया…

% दिन पहले

योग के लिए आना

जीवन से और लोगों से घृणा और विरक्ति के कारण इस योग के लिए नहीं…

% दिन पहले

धर्मक्षेत्र

सारा जीवन ही धर्मक्षेत्र है, संसार भी धर्म है। केवल आध्यात्मिक ज्ञानलोचना और शक्ति की…

% दिन पहले

गर्व को त्यागने का तरीका

भगवान् के प्रति पूर्ण आत्मदान के लिए तीन विशेष विधियां : १. सारे गर्व को…

% दिन पहले