परिस्थितियाँ अवसर भले हों पर निश्चित रूप से, कारण नहीं हो सकती । कारण ‘भागवत’ इच्छा में है और उसे कुछ भी नहीं बदल सकता ।
इसलिए, विलाप मत करों और अपने अवसाद को ‘भगवान’ के चरणों में अर्पित कर दो। वे तुम्हें शांति और मुक्ति देंगे ।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-३)
एक या दो बार, बस खेल-ही-खेलमें आपने अपनी या श्रीअरविंदकी कोई पुस्तक ली और सहसा…
मेरे प्यारे बालक, तुम हमेशा मेरी भुजाओं में रहते हो और मैं तुम्हें सुख-सुविधा देने,…